मध्यपाषाण (Mesolithic) कालीन संस्कृति जो झारखण्ड में 9000 ई पूर्व से 4000 ई पूर्व मध्य थी ,का प्रमाण गढ़वा जिला के भवनाथपुर ,झरवार ,हाथीगाव ,बालुगरा एवं नकगढ़ में कराय गए उत्खनन से मिलता है ,जहां से अनेक पाषाण उपकरण प्राप्त हुए है।
झारखण्ड में नवपाषाण संस्कृति का काल 3000 ई पूर्व से 1500 ई पूर्व तक माना जाता है। भवनाथपुर ,झरवार ,बालुगारा ,नाकगढ़ आदि से कुल्हाड़ी ,खुरचनी ,तक्षणी जैसे नवपाषाण उपकरण पाए गए है। नवपाषाण कालीन अन्य प्रमुख स्थलों में बुर्ज बुरहाडी ,रारु नदी (चाईबासा ),बुरूहातु ,दरगामा ,चक्रधरपुर (चाईबासा ),बूढाडीह एवं तमाड़ (रांची ) आदि है। पुरातत्वेता बोरमैन ने नवपाषाण काल के 12 प्रकार के हस्तकुठार की खोज की है ,जिसका विवरण उनकी पुस्तक "द निरोलिथिक पैटर्न इन प्री हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया " में मिलता है।
-

No comments:
Post a Comment