Wednesday, 2 October 2019

Gandhi & Jharkhand

       गाँधी जी का राष्ट्रिय आंदोलन में प्रवेश 1919 ई में हुआ। गांधीजी का अहिंसा पर आधारित असहयोग आंदोलन का समर्थन छोटानागपुर के लोगों ने भी किया। छोटानागपुर खास के टाना भगतों ने जो जतरा भगत के नेतृत्व में 1914 ई से पुनरुत्थानवादी आंदोलन चला रहे थे,1920 ई में गाँधी द्वारा प्रारंभ किये गए असहयोग आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

       1918 ई में रॉलेक्ट एक्ट का पुरे देश के साथ - साथ झारखण्ड में भी विरोध किया गया। 1925 में गांधीजी ने झारखण्ड की यात्रा की इस समय गांधीजी ने हज़ारीबाग के संत कोलम्बस कॉलेज में सभा की थी। 1925 ई में गांधीजी  सी एफ एंडूज के अनुरोध पर जमशेदपुर आये थे.                                                                           
       सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय पुरे देश के साथ-साथ झारखण्ड में भी कुछ घटनाओं जैसे 1928 ई में साइमन कमीशन का विरोध , 1928 ई. का नेहरू रिपोर्ट ,1929 ई. के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की घोसणा ,गांधीजी द्वारा लार्ड इरविन के सामने रखे गए 11 सूत्री मांग को अस्वीकार कर देना आदि ने एक बड़े आंदोलन की भूमिका तैयार कर दी थी। 6 अप्रैल 1930 ई. को दांडी के समुद्र तट पर नमक बनाकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत गांधीजी ने की। 13 अप्रैल को झारखण्ड में भी आंदोलनकारियों ने अनेक स्थानों पर नमक बनाकर नमक कानून को तोड़ा।                                                                                                    
       हज़ारीबाग के मोपना मांझी तथा चेतन महतो की मौत पटना कैम्प जेल में हो गयी थी, जिसके विरोध में हज़ारीबाग में 6 मार्च , 1932 ई को विरोध सभा का आयोजन किया गया था। नमक सत्याग्रह में हज़ारीबाग क्षेत में    संथाल जनजाति ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। 8 मार्च को डुमरी में संथालों सभा हुयी थी। संथाल        आंदोलनकारियों का नेतृत्व गोमिया के बोरोगेरा ग्राम का बंगम मांझी कर रहा था.                
      गांधीजी ने 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन प्रारम्भ किया था। व्यक्तिगत सत्याग्रह के समय 1940 में गांधीजी अंतिम बार रांची आये थे तथा निवारण बाबू से मिलने निवारणपुर गए थे ,जहां उन्होंने एक सभा भी की थी।                                                                                                                             
       1942 ई के ' भारत छोडो आंदोलन ' में भी झारखण्ड में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 14 अगस्त , 1942 को रांची के जिला स्कूल के विद्यार्थियों ने जुलूस निकालकर भारत छोडो आंदोलन की शुरुआत की। 18 अगस्त को टाना भगतों ने विशुनपुर थाना को जला दिया। आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त को इटकी तथा टांगर बसली के बिच रेल की पटरी उखाड़ दी। अबरख की खानों में काम करने वाले श्रमिकों ने झुमरी तिलैया में जुलूस निकाला , जिसमे 113 लोग गिरफ्तार किये गए डोमचांच में भी एक जुलूस निकाला गया।,जिस पर पुलिस ने गोली चलाई जिसमे 2 व्यक्ति मारे गए तथा 22 लोग घायल हुए।                                                                  

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